शिशुओं और बच्चों द्वारा उल्टी करना

इनके द्वाराDeborah M. Consolini, MD, Thomas Jefferson University Hospital
द्वारा समीक्षा की गईAlicia R. Pekarsky, MD, State University of New York Upstate Medical University, Upstate Golisano Children's Hospital
समीक्षा की गई/बदलाव किया गया संशोधित मार्च २०२५
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उल्टी करना, खाद्य पदार्थ का असुविधाजनक होना, अनैच्छिक होना, बलपूर्वक भोजन को मुंह के ज़रिए बाहर निकालना है।

शिशुओं में, उल्टी करने और थूकने में भेद अवश्य किया जाना चाहिए। फीडिंग कराते समय या उसके थोड़े समय के बाद, शिशु थोड़ी मात्रा में थूक बाहर निकालते हैं—खास तौर पर डकार दिलवाते समय वे ऐसा करते हैं। थूकना, शिशु के बहुत तेजी से फीडिंग लेने की वजह से हो सकता है, क्यूंकि ऐसे में वे हवा को निगल लेते हैं या उनकी ओवरफीडिंग की जाती है, लेकिन ऐसा बिना किसी कारण से भी हो सकता है। उल्टी करना खास तौर पर किसी विकार के कारण होता है। अनुभवी माता-पिता आमतौर पर उल्टी करना और थूकने में अंतर बता सकते हैं, लेकिन सबसे पहले माता-पिता को डॉक्टर या नर्स से बात करने की ज़रूरत पड़ सकती है।

उल्टी होने से शरीर में फ़्लूड की काफ़ी कमी (डिहाइड्रेशन) हो जाती है। कभी-कभी कम हुए फ़्लूड की पूर्ति करने के लिए पर्याप्त ड्रिंक नहीं ले पाते हैं-क्योंकि वे लगातार उल्टी कर रहे हैं या वे ड्रिंक करना नहीं चाहते हैं। ऐसे बच्चे जो उल्टी कर रहे हैं वे आमतौर पर कुछ भी खाना नहीं चाहते हैं, लेकिन इस भूख के अभाव के कारण शायद ही कभी कोई समस्या होती है।

(वयस्कों में मतली तथा उल्टी करना भी देखें।)

शिशुओं और बच्चों में उल्टी के कारण

निगले हुए विषाक्त तत्वों से उल्टी करके मुक्ति पाना लाभदायक हो सकता है। लेकिन, अक्सर उल्टी किसी विकार के कारण होती है। आमतौर पर, सापेक्षिक रूप से यह विकार हानिरहित होता है, लेकिन कभी-कभी उल्टी करना गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है, जैसे पेट या आंत में अवरोध या खोपड़ी के भीतर दबाव का बढ़ना (इंट्राक्रेनियल हाइपरटेंशन)।

सामान्य कारण

उल्टी करने के संभावित कारण बच्चे की आयु पर निर्भर करते हैं।

नवजात शिशुओं तथा शिशुओं में, उल्टी करने के सर्वाधिक आम कारणों में निम्नलिखित शामिल होते हैं

बड़े बच्चों में, उल्टी का सबसे आम कारण है

  • वायरस के कारण गैस्ट्रोएन्टेराइटिस

कम सामान्य कारण

नवजात शिशुओं और शिशुओं में, उल्टी के कुछ कारण, हालांकि कम आम हैं, महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे जानलेवा साबित हो सकते हैं:

  • 3 से 6 सप्ताह की आयु के शिशुओं में पेट (पाइलोरिक स्टेनोसिस) से निकलने वाले मार्ग का संकुचन या रुकावट

  • जन्मजात दोषों के कारण आंत में अवरोध, जैसे आंत का मुड़ना (वॉल्वुलस) या संकुचन (स्टेनोसिस)

  • 3 से 36 महीने की आयु के शिशुओं में आंत के एक खंड का दूसरे में स्लाइड करना (इन्टससेप्शन)

खाद्य असहनीयता, गाय के दूध के प्रोटीन से एलर्जी और कुछ असामान्य वंशानुगत चयापचय विकारों के कारण भी नवजात शिशुओं और शिशुओं में उल्टी हो सकती है।

बड़े बच्चों और किशोरों में उल्टी के अन्य कारणों में गंभीर संक्रमण (जैसे कि किडनी में संक्रमण या मेनिनजाइटिस), एक्यूट एपेंडिसाइटिस, खोपड़ी के भीतर दबाव बढ़ाने वाला विकार (जैसे कि मस्तिष्क ट्यूमर या सिर में गंभीर चोट), गैस्ट्रोइसोफ़ेजियल रिफ़्लक्स डिजीज या पेप्टिक अल्सर रोग, धीरे-धीरे खाली होने वाला पेट (गैस्ट्रोपेरेसिस), खाद्य एलर्जी, खाने के विकार, किसी विषाक्त पदार्थ का सेवन (जैसे कि बड़ी मात्रा में एसिटामिनोफेन, आयरन या अल्कोहल) और चक्रीय उल्टी शामिल हैं।

किशोरों में, कारणों में गर्भावस्था और कैनबिस (भांग—कैनाबिनोइड हाइपरमेसिस सिंड्रोम) का लगातार उपयोग भी शामिल है।

शिशुओं और बच्चों में उल्टी का मूल्यांकन

डॉक्टरों के लिए पहला लक्ष्य यह तय करना होता है कि क्या बच्चे डिहाइड्रेटेड हैं और क्या उल्टी जानलेवा विकार के कारण हो रही है।

चेतावनी के संकेत

निम्नलिखित लक्षण और विशेषताएं चिंता का कारण होती हैं:

  • सुस्ती और निष्क्रियता

  • शिशुओं में, शांत न होना या चिड़चिड़ापन और खोपड़ी के बीच में कोमल जगहों का उभरना (फ़ॉन्टानेल्स)

  • बड़े बच्चों में, गंभीर सिरदर्द, जकड़ी हुई गर्दन जिससे ठोढ़ी को सीने तक नीचे झुकाना मुश्किल हो जाता है, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता तथा बुखार

  • एब्डॉमिनल दर्द, सूजन या दोनो

  • ऐसे शिशुओं में निरन्तर बनी रहने वाली उल्टी जो उम्मीद के मुताबिक प्रगति या विकास नहीं कर रहे हैं

  • रक्तयुक्त मल

  • चटक हरे या खून के रंग की उल्टी

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए

ऐसे बच्चे जिनमें चेतावनी संकेत नज़र आते हैं, उनका तत्काल डॉक्टर द्वारा मूल्यांकन किया जाना चाहिए, और ऐसा ही सभी नवजात शिशुओं के लिए भी किया जाना चाहिए; ऐसे बच्चे जिनकी उल्टी में रक्त निकलता है, और वो कॉफी ग्राउंड की तरह नज़र आती है, या चमकदार हरे रंग की उल्टी होती है; और बच्चे जिनको हाल में (एक सप्ताह के भीतर) सिर पर चोट लगी है। यदि बच्चे उल्टी न करने के बावजूद भी असहज दिखाई देते हैं तथा उनकी असहजता कुछ घंटों के बाद भी बनी रहती है, तो शायद उनकी जाँच डॉक्टर द्वारा की जानी चाहिए।

दूसरे बच्चों के लिए, डिहाइड्रेशन के संकेत, खास तौर पर पेशाब की घटी हुई मात्रा तथा वह तरल मात्रा जिसको वे पीते हैं, से यह तय करने में मदद मिलती है कि उनकी जांच कितनी जल्दी किया जाना ज़रूरी है। ऐसे मामलों में कितनी जल्दी प्रतिक्रिया करनी है, इसका आयु के हिसाब से काफी हद तक फर्क पड़ता है क्योंकि शिशु तथा छोटे बच्चे, बड़े बच्चों की तुलना में कहीं अधिक शीघ्रतापूर्वक डिहाईड्रेटेड हो सकते हैं। आम तौर पर, शिशु और छोटे बच्चे जिन्होंने 8 घंटे से अधिक समय से पेशाब नहीं किया है या जो 8 घंटे से अधिक समय से कुछ भी पीने के लिए अनिच्छुक हैं, उनकी जांच डॉक्टर द्वारा की जानी चाहिए।

यदि बच्चों को 6 से 8 बार उल्टी हो चुकी है और उल्टी 24 से 48 घंटों तक बनी रहती है, या अन्य लक्षण (जैसे खांसी, बुखार, या चकत्ते) मौजूद हैं, तो डॉक्टर से संपर्क किया जाना चाहिए।

ऐसे बच्चे जिन्होंने कुछ बार ही उल्टी की है (अतिसार के साथ या उसके बिना), और जो कम से कम कुछ फ़्लूड ले रहे हैं, तथा जो बाकी तरह से बहुत अधिक बीमार नज़र नहीं आते हैं, उनको बहुत कम ही डॉक्टर की ज़रूरत होती है।

डॉक्टर क्या करते हैं

डॉक्टर पहले बच्चे के लक्षणों और चिकित्सा इतिहास के बारे में प्रश्न पूछते हैं। उसके बाद डॉक्टर एक शारीरिक परीक्षण करते हैं। बच्चे के लक्षणों की जानकारी तथा गहन रूप से जाँच करने से आमतौर पर डॉक्टर उल्टी के कारण की पहचान करने में समर्थ हो जाते हैं ( तालिका देखें)।

डॉक्टर पूछते हैं

  • उल्टी की शुरुआत कब हुई थी

  • यह कितने अंतराल पर होती है

  • उल्टी कैसी नज़र आती है (जिसमें इसका रंग भी शामिल है)

  • क्या यह जोर से होती है (प्रोजेक्टाइल)

  • कितनी मात्रा में उलटी की गई

यह तय करना कि कोई पैटर्न है—दिन के खास समय पर होती है या कुछ खास प्रकार के भोजन के सेवन के बाद होती है—से संभावित कारण को तय करने में डॉक्टर को सहायता मिलती है। अन्य लक्षणों के बारे में जानकारी से (जैसे बुखार या पेट दर्द), मल त्याग (कितनी बार तथा लगातार), और पेशाब करने के बारे में जानने से भी डॉक्टर को कारण की पहचान करने में सहायता मिल सकती है।

डॉक्टर हाल ही में की गई यात्रा और चोटों के बारे में भी पूछते हैं।

डॉक्टर किशोर लड़कियों से माहवारी न आने, वज़न बढ़ने और सुबह उल्टी के बारे में पूछते हैं।

शारीरिक जांच की जाती है ताकि संभावित कारणों के संकेतों का पता लगाया जा सके। डॉक्टर यह नोट करते हैं कि क्या बच्चे उम्मीद के अनुसार प्रगति और विकास कर रहे हैं।

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परीक्षण

डॉक्टर जांच के परिणामों को देखकर संदेहयुक्त कारणों के आधार पर परीक्षण करते हैं। अधिकांश बच्चों के लिए किसी परीक्षण की ज़रूरत नहीं होती है। लेकिन, यदि पेट में असमान्यताओं का संदेह होता है, तो खास तौर पर इमेजिंग परीक्षण किए जाते हैं। यदि वंशानुगत चयापचय विकार का संदेह है, तो रक्त परीक्षण किया जाता है।

यदि डिहाइड्रेशन का संदेह है, तो कभी-कभी इलेक्ट्रोलाइट की माप (शरीर में फ़्लूड के संतुलन को बनाए रखने के लिए आवश्यक खनिज) करने के लिए रक्त परीक्षण किए जाते हैं।

शिशुओं और बच्चों में उल्टी के उपचार

यदि कोई विशिष्ट विकार इसका कारण है, तो उसका उपचार किया जाता है। गैस्ट्रोएन्टेराइटिस के कारण होने वाली उल्टी आमतौर पर अपने आप ही रूक जाती है।

फ़्लूड

यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होता है, कि बच्चे भली भांति हाईड्रेटेड हैं। आमतौर पर फ़्लूड मौखिक रूप से दिए जाते हैं (बच्चों मे डिहाइड्रेशन देखें)। मौखिक रिहाईड्रेशन घोल जिनमें इलेक्ट्रोलाइट का सही संतुलन होता है, उनका प्रयोग किया जाता है। अमेरिका में, अधिकांश फार्मेसी तथा सुपरमार्केट में ये घोल विस्तृत रूप से बिना किसी प्रिस्क्रिप्शन के उपलब्ध हैं। स्पोर्ट्स ड्रिंक, सोडा, जूस तथा ऐसे ही ड्रिंक्स में बहुत ही कम सोडियम और बहुत अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है तथा इनका प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

यहां तक कि जो बच्चे बार-बार उल्टी करते हैं, यदि उनको अक्सर यह घोल दिया जाता है, तो वह भी उसे पचा लेते हैं। खास तौर पर, हर 5 मिनट पर 1 छोटा चम्मच (5 मिलीलीटर) दिया जाता है। यदि बच्चे इतनी मात्रा को पचा लेते हैं, तो धीरे-धीरे इस मात्रा को बढ़ाया जाता है। धैर्य और प्रोत्साहन के साथ, अधिकांश बच्चे मौखिक रूप से पर्याप्त फ़्लूड ले सकते हैं और शिरा द्वारा फ़्लूड की जरूरत से बचा सकता है (इंट्रावीनस फ़्लूड)। लेकिन, ऐसे बच्चे जिनको गंभीर डिहाइड्रेशन है तथा वे बच्चे जो मौखिक रूप से पर्याप्त फ़्लूड नहीं ले पाते हैं, उनको इंट्रावीनस फ़्लूड की आवश्यकता हो सकती है।

उल्टी कम करने की दवाएं

मतली और उल्टी को कम करने के लिए वयस्कों में अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं बच्चों में कम इस्तेमाल की जाती हैं क्योंकि उनकी उपयोगिता साबित नहीं हुई है। साथ ही, इन दवाओं के दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं जिनमें आलस होना, चक्कर आना, सिरदर्द और कब्ज़ शामिल हैं। लेकिन, यदि मतली और उल्टी गंभीर है या ये ठीक नहीं होती, तो डॉक्टर प्रोमेथाज़िन, प्रॉक्लोपेराज़िन, मेटोक्लोप्रमाइड, या ओन्डेनसेट्रोन उन बच्चों को दे सकते हैं जिनकी आयु 2 वर्ष से अधिक है।

आहार

बच्चे द्वारा पर्याप्त फ़्लूड लेने और उल्टी न करने पर उनकी आयु के अनुसार उनको उपयुक्त आहार दिया जाना चाहिए।

शिशुओं को मां का दूध या फार्मूला दिया जा सकता है।

महत्वपूर्ण मुद्दे

  • आम तौर पर, उल्टी वायरस के कारण होने वाले गैस्ट्रोएन्टेराइटिस के कारण और ऐसे कारणो से होती है जो लंबे समय तक नहीं रहते या गंभीर समस्याओं का कारण नहीं होते हैं।

  • कभी-कभी उल्टी करना किसी गंभीर विकार का संकेत होता है।

  • यदि उल्टी के साथ अतिसार होता है, तो कारण संभवतः गैस्ट्रोएन्टेराइटिस होता है।

  • अगर उल्टी जारी रहती है या बच्चों में कोई चेतावनी संकेत (जैसे सुस्ती, चिड़चिड़ापन, गंभीर सिरदर्द, पेट में दर्द या सूजन, खूनी या चमकदार हरे रंग की उल्टी या खून के साथ मल) दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर द्वारा उनका तत्काल मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

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