गर्दन में गाँठ

इनके द्वाराMarvin P. Fried, MD, Montefiore Medical Center, The University Hospital of Albert Einstein College of Medicine
द्वारा समीक्षा की गईLawrence R. Lustig, MD, Columbia University Medical Center and New York Presbyterian Hospital
समीक्षा की गई/बदलाव किया गया संशोधित मार्च २०२५
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लोगों को उनकी गर्दन पर असामान्य गांठ (उभार) दिखाई दे सकता है। कभी-कभी डॉक्टर को जांच के दौरान गर्दन पर उभार दिखाई देता है। गर्दन की गाँठें इस आधार पर दर्द वाली या दर्द-रहित हो सकती हैं कि वे किस कारण हुई हैं। इससे पहले कि लोगों को उनका पता चले, गर्दन की दर्द-रहित गाँठें बहुत लंबे समय से मौजूद हो सकती हैं।

गर्दन में गांठ बनने के कारण

गर्दन की ज़्यादातर गाँठें बढ़ चुकी लसीका ग्रंथियां होती हैं। कभी-कभी यह गांठ एक जन्मजात उभार होता है, जिसमें लार ग्रंथि या थायरॉइड ग्लैंड बढ़ जाती है।

संक्रमण के कारण बढ़ी हुई लसीका ग्रंथि

कम उम्र के लोगों में लसीका ग्रंथियों के बढ़ने के सबसे सामान्य कारण निम्नलिखित होते हैं:

  • आस-पास के संक्रमण (जैसे सर्दी-जुकाम या गले के संक्रमण) के विरुद्ध प्रतिक्रियाएं

  • लसीका ग्रंथि का सीधा बैक्टीरियल संक्रमण

  • पूरे शरीर में होने वाले (सिस्टेमिक) अन्य संक्रमण

ऊपरी श्वसन तंत्र के संक्रमण, गले के संक्रमण या दाँत के संक्रमण के प्रतिक्रिया स्वरूप गर्दन की एक या एक से अधिक लसिका ग्रंथियां अक्सर बढ़ जाती हैं। ऐसे मामलों में, ग्रंथियां नरम होती हैं और आमतौर पर कोमल नहीं होती हैं। संक्रमण ठीक हो जाने के बाद वे आमतौर पर सामान्य रूप में वापस आ जाते हैं।

कभी-कभी, बैक्टीरिया लसीका ग्रंथि को सीधे भी संक्रमित कर सकता है (लिम्फ़ाडेनाइटिस कहा जाता है)। इन संक्रमणों में बिल्ली-खरोंच रोग, टोक्सोप्लाज़्मोसिस और एक्टिनोमाइकोसिस शामिल हैं। ऐसे संक्रमणों में, संक्रमित लसीका ग्रंथियां छूने पर काफ़ी कोमल लगती हैं।

कुछ सिस्टेमिक संक्रमणों के कारण आमतौर पर गले की ग्रंथियों सहित कई लसीका ग्रंथियां बढ़ जाती हैं। इनमें से सबसे सामान्य संक्रमण मोनोन्यूक्लियोसिस, ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस (HIV) और ट्यूबरक्लोसिस होते हैं।

गर्दन में कैंसरयुक्त उभार

लसीका ग्रंथियों का बढ़ना, कम सामान्य लेकिन अधिक गंभीर कारण होता है

  • कैंसर

गर्दन में कैंसरयुक्त (हानिकारक) गांठें वयोवृद्ध वयस्कों में अधिक आम हैं, लेकिन ये कम उम्र के लोगों में भी हो सकती हैं। कैंसरयुक्त गांठ निम्न में से कोई भी हो सकती है:

  • आस-पास की किसी संरचना, जैसे मुंह या गले का कैंसर हो सकता है, जो गर्दन तक बढ़ गया हो

  • कैंसरयुक्त लसीका ग्रंथि, जो तब हो सकता है जब कैंसर आस-पास की संरचना से या शरीर के अधिक दूर के हिस्सों से फैलता है (मेटास्टेसाइज)

  • वह कैंसर जो लिम्फ़ैटिक प्रणाली (लिम्फ़ोमा) में शुरू होता है।

कैंसरयुक्त उभारों में दर्द नहीं होता है और वे छूने सूजन जैसे नहीं लगते हैं और वे अक्सर बहुत सख्त होते हैं।

अन्य कारण

सिस्ट खोखले और द्रव से भरे हुए उभार होते हैं, जो हानिरहित होते हैं, बशर्ते कि उनमें संक्रमण न हो। भ्रूण के विकास के दौरान हुई असामान्यताओं के कारण गर्दन के कुछ सिस्ट जन्म से ही मौजूद हो सकते हैं। कभी-कभी सिस्ट त्वचा में, जैसे कि गर्दन की त्वचा में उत्पन्न हो जाते हैं (एपिडर्मोइड सिस्ट)।

जबड़े के नीचे मौजूद लार ग्रंथि (सबमैंडिबुलर ग्रंथि) अगर स्टोन से ब्लॉक हो जाती है या संक्रमित हो जाती है या उसमें कैंसर हो जाता है, तो यह ग्रंथि बढ़ सकती है।

थायरॉइड ग्लैंड, जो गर्दन के बीच में छाती की हड्डी के एकदम ऊपर मौजूद होती है, बढ़ सकती है। सबसे सामान्य प्रकार की बढ़त घेंघा होती है, जो कैंसर-रहित (मामूली) होती है। थायरॉइड कैंसर और थायरॉइड की सूजन (थायरॉइडाइटिस) के मामले कम होते हैं।

गर्दन में गांठों का मूल्यांकन

आगे की जानकारी लोगों को यह तय करने में मदद कर सकती है कि किसी डॉक्टर के मूल्यांकन की आवश्यकता है या नहीं और यह जानने में उनकी मदद कर सकती है कि मूल्यांकन के दौरान क्या अपेक्षा की जानी चाहिए।

चेतावनी के संकेत

गर्दन में गाँठ से पीड़ित लोगों में, कुछ लक्षण और विशेषताएं चिंता की वजह होती हैं। उनमें शामिल हैं

  • बहुत कठोर या बहुत बड़ी गांठ

  • मुंह में छाले या वृद्धियां

  • कुछ भी निगलने में परेशानी और/या आवाज़ बदलना

  • वृद्ध व्यक्ति में एक या कई नए उभार

आमतौर पर, दर्द-रहित उभार, दर्द वाले उभारों की तुलना में अधिक चिंताजनक होते हैं।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए

जिन लोगों की गर्दन पर किसी भी तरह का कोई उभार कई दिनों से बना हुआ हो, उन्हें उसे डॉक्टर को दिखाना चाहिए, ख़ासतौर पर उन लोगों को जिनमें चेतावनी के संकेत दिख रहे हों। अन्य लक्षणों (जैसे बुखार) से पीड़ित लोगों को जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

डॉक्टर क्या करते हैं

डॉक्टर व्यक्ति के लक्षणों और चिकित्सा इतिहास के बारे में सवाल पूछते हैं और शारीरिक परीक्षण करते हैं। इतिहास और शारीरिक परीक्षण के दौरान डॉक्टर जो पाते हैं, उससे यह तय करने में मदद मिलती है कि यदि कोई हो, तो क्या परीक्षण किए जाने की ज़रूरत है।

चिकित्सा इतिहास के दौरान, डॉक्टर निम्नलिखित के बारे में पूछते हैं:

  • जुकाम के लक्षण (जैसे गला खराब होना, छींक आना और नाक बहना) और गले में संक्रमण (जैसे कि निगलते समय दर्द होना) और दांतों में संक्रमण (जैसे दांत का दर्द)

  • गर्दन में कैंसर के लक्षण (जैसे कि बोलने या निगलने में परेशानी) और साथ ही कैंसर के जोखिम के कारक, खासतौर पर धूम्रपान करना और अल्कोहल पीना

  • HIV और ट्यूबरक्लोसिस संक्रमण के जोखिम कारक

शारीरिक जांच के दौरान, डॉक्टर कानों, नाक और गले (टॉन्सिल, जीभ के आधार और थायरॉइड व लार ग्रंथियों सहित) पर ज़्यादा ध्यान देते हैं। वे संक्रमण या असामान्य वृद्धियों के संकेत ढूँढते हैं, इसके लिए वे आईने से या एक पतली लचीली देखने वाली ट्यूब के ज़रिए गले के अंदर देख सकते हैं (लैरींगोस्कोपी)। वे गर्दन के गांठ या गांठों को छूकर भी देखते हैं जिससे यह निर्धारित किया जा सके कि वह मुलायम है, रबर जैसा है या सख्त है या फिर बहुत नाजुक है।

परीक्षण

यदि संक्रमण का एक स्पष्ट स्रोत है (जैसे कि सर्दी-जुकाम या गला खराब होना) या यदि व्यक्ति कम उम्र का और स्वस्थ होता है और कोमल उभार सिर्फ़ कुछ ही दिन पहले बना होता है, तो तुरंत कोई टेस्ट करने की ज़रूरत नहीं होती है। ऐसे लोगों की कड़ी निगरानी करके देखा जाता है कि क्या उनका उभार बिना उपचार के अपने आप ठीक हो रहा है।

यदि गांठ खत्म नहीं होती है, तो पूर्ण रक्त गणना (CBC) और छाती का एक्स-रे सहित परीक्षणों की आवश्यकता होती है। डॉक्टर व्यक्ति के मल का परीक्षण कर इसमें रक्त की उपस्थिति जांच सकते हैं।

अगर जवान लोगों को कैंसर या कैंसर की ओर इशारा करने वाली खोज (जैसे मुंह में कहीं किसी तरह की हुई वृद्धियों) से खतरा नहीं है, तो इमेजिंग टेस्ट किये जाते हैं और कभी-कभी इसके बाद बायोप्सी भी की जाती है।

वयोवृद्ध वयस्कों के लिए, खासतौर पर कैंसर के चेतावनी संकेतों या जोखिम कारकों वाले लोगों में जांच के लिए डॉक्टर अक्सर गांठ का एक टुकड़ा (नीडल बायोप्सी) या पूरी गांठ निकालने (चीरे वाली बायोप्सी) से पहले कैंसर का स्रोत ढूंढने के लिए कई जांचें करते हैं। ऐसी जाँचों में अक्सर खून की जाँच और सिर व गर्दन की कंप्यूटेड टोमोग्राफ़ी (CT) या मैग्नेटिक रीसोनेंस इमेजिंग (MRI) शामिल होती हैं।

बच्चों को रेडिएशन से बचाने के लिए उनमें अल्ट्रासोनोग्राफ़ी को प्राथमिकता दी जाती है और अगर डॉक्टर को थायरॉइड की गांठ होने का संदेह हो, तो वयस्कों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। बच्चों में, गर्दन में होने वाली गांठों की सबसे आम वजह इंफेक्शन होता है, इसलिए इमेजिंग टेस्ट करने से पहले बच्चों को एंटीबायोटिक्स देकर गांठ ठीक करने की कोशिश की जाती है।

शरीर के अन्य हिस्सों में उत्पन्न होने वाले कैंसर की जाँच करने के लिए, डॉक्टर आमतौर पर ऊपरी पाचन तंत्र का एक्स-रे लेते हैं, थायरॉइड की जाँच करते हैं और छाती का CT स्कैन करते हैं। लैरिंक्स (लैरिंगोस्कोपी), फेफड़ों (ब्रोंकोस्कोपी) और इसोफ़ेगस (इसोफ़ेगोस्कोपी) की सीधी जाँच और इनकी एक साथ बायोप्सी करना ज़रूरी हो सकता है।

गर्दन की गांठों का इलाज

डॉक्टर गर्दन के उभार के कारण का उपचार करते हैं।

अगर लसीका ग्रंथि की कोई गांठ संक्रमण के कारण बड़ी हो जाती है, तो संक्रमण ठीक होने के बाद गांठ आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाती है।

जब उभार में कैंसर कोशिकाएं पाई जाती हैं या गर्दन की लसीका ग्रंथि बढ़ जाती है और शरीर में कहीं ओर कैंसर का कोई और संकेत नहीं होता है, तब कैंसर कोशिकाओं वाला पूरे उभार या पूरी लसीका ग्रंथि को गर्दन के अंदर मौजूद सभी अतिरिक्त लसीका ग्रंथियों और फैटी ऊतकों सहित निकाल दिया जाता है। अगर ट्यूमर बहुत बड़ा होता है, तो डॉक्टर आस-पास की मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के साथ-साथ आंतरिक जुगुलर शिरा को भी निकाल सकते हैं। अक्सर रेडिएशन थेरेपी भी दी जाती है।

महत्वपूर्ण मुद्दे

  • गर्दन की ज़्यादातर गाँठें बढ़ चुकी लसीका ग्रंथियां होती हैं।

  • दर्द-रहित उभार अक्सर दर्द वाले उभारों की तुलना में अधिक चिंताजनक होते हैं।

  • जब तक डॉक्टर को कैंसर का संदेह न हो, तब तक आमतौर पर टेस्टिंग ज़रूरी नहीं होती है।

  • अगर शरीर के किसी हिस्से में कैंसर के संकेत नहीं मिलते हैं, तो गर्दन की कैंसरयुक्त गांठों को सर्जरी से निकाला जाता है।

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