घबराहट विकार की विशेषताओं में कम से कम सप्ताह में एक बार घबराहट के दौरे होना शामिल होता है। पैनिक अटैक तेज़ घबराहट का एक छोटा (लगभग 15 से 20 मिनट) दौरा है, जिसके साथ आमतौर पर शारीरिक लक्षण भी होते हैं, जैसे कि तेज़ी से सांस लेना, दिल की धड़कन तेज़ होना, पसीना आना, सीने में दर्द और मतली।
घबराहट विकार का निदान उस समय किया जाता है जब बच्चों को बार-बार घबराहट के दौरे पड़ते हैं जिससे महत्वपूर्ण रूप से विकृति या पीड़ा होती है।
घबराहट संबंधी विकार का उपचार आमतौर पर दवाओं और व्यवहार से जुड़ी थेरेपी के संयोजन से किया जाता है।
(वयस्कों में पैनिक अटैक और पैनिक विकार भी देखें।)
पैनिक विकार छोटे बच्चों की तुलना में किशोरों में अधिक आम है, तथा किशोर लड़कियों में किशोर लड़कों की तुलना में अधिक बार होता है। कभी-कभी बच्चों को बचपन में पृथकता चिंता या सामान्यकृत चिंता होती है और जब वे यौवनावस्था में पहुंचते हैं तो उनमें घबराहट विकार विकसित हो जाता है।
घबराहट के दौरे किसी भी चिंता विकार में हो सकता है, आमतौर पर उस विकार पर ध्यान केन्द्रित करने के कारण ऐसा होता है। उदाहरण के लिए, पृथकता चिंता से पीड़ित बच्चों को उस समय घबराहट का दौरा पड़ जाता है जब माता-पिता बाहर जाते हैं। ऐसे बच्चे जिनको ऐसी जगहों पर फंस जाने का डर होता है जहां से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होता (एग्रोफ़ोबिया), उनको तब घबराहट का दौरा पड़ सकता है जब भीड़ भरे ऑडिटोरियम में वे बीच की पंक्ति में बैठे होते हैं। अनेक बच्चे जिनको घबराहट विकार होता है, उनको एग्रोफ़ोबिया भी होता है।
शारीरिक विकार जैसे दमा से भी घबराहट के दौरे हो सकते हैं और घबराहट के दौरों के कारण भी दमा हो सकता है।
बच्चों में पैनिक डिसऑर्डर के लक्षण
घबराहट के दौरे के दौरान, बच्चों को बहुत अधिक चिंता महसूस होती है, जिसके कारण शारीरिक लक्षण पैदा हो जाते हैं। दिल तेजी से धड़कता है। बच्चों को बहुत अधिक पसीना आ सकता है और उनकी सांस फूल सकती है। उनको सीने में दर्द या चक्कर आने जैसा महसूस हो सकता है, उनकी मतली महसूस हो सकती है या वे सुन्नपन महसूस कर सकते हैं। बच्चों को ऐसा लग सकता है कि वे मरने जा रहे हैं या पागल होने जा रहे हैं। उनको चीजें अवास्तविक नज़र आ सकती हैं। वयस्कों की तुलना में लक्षण अधिक नाटकीय (चिल्लाना, रोना, या हाइपरवेन्टिलेटिंग शामिल होते हैं) हो सकते हैं।
बच्चों को अन्य दौरों की भी चिंता हो सकती है। घबराहट के दौरे तथा संबंधित चिंताएं रिश्तों और स्कूल के कार्य में हस्तक्षेप करते हैं।
घबराहट विकार में, घबराहट के दौरे आमतौर पर अपने आप ही होते हैं, जिसके लिए कोई विशिष्ट उत्प्रेरक नहीं होता है। लेकिन समय के साथ-साथ, बच्चे ऐसी स्थितियों से बचने लगते हैं जिनको वे दौरों के साथ सम्बद्ध करते हैं। इस तरह से बचने के परिणामस्वरूप एग्रोफ़ोबिया हो सकता है, जिससे बच्चे स्कूल जाने, मॉल में जाने या अन्य विशिष्ट गतिविधियों को करने के अनिच्छुक हो सकते हैं।
बिना किसी स्पष्ट कारणों के घबराहट विकार अक्सर बदतर या कम हो जाता है। लक्षण अपने आप गायब हो सकते हैं और फिर वर्षों बाद अपने आप वापस आ सकते हैं। लेकिन, उपचार के साथ, अधिकांश बच्चों में घबराहट विकार में सुधार हो जाता है।
कभी-कभी, जब घबराहट विकार का उपचार नहीं किया जाता है, किशोर बीच में ही स्कूल जाना छोड़ देते हैं, समाज से अलग हो जाते हैं, तथा एकांतप्रिय और आत्मघाती प्रवृति के हो जाते हैं।
बच्चों में पैनिक विकार का निदान
मानक मनोरोग-विज्ञान संबंधी निदान मानदंडों के आधार पर डॉक्टर या व्यवहारिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ का मूल्यांकन
कभी-कभी लक्षणों के बारे में प्रश्नावलियाँ
डॉक्टर उस समय घबराहट विकारों का निदान करते हैं, जब बच्चों को
अनेक बार घबराहट के दौरे पड़ चुके होते हैं
दौरों को उत्प्रेरित करने वाली स्थितियों से बचने के लिए अपने व्यवहार में बदलाव करते हैं
संभावित भावी दौरों से बारे में चिंतित होते हैं
ऐसा कोई विकार न हो, जिसकी वजह से लक्षण पैदा होते हैं (ऐसे शारीरिक विकार जिनकी वजह से ऐसे लक्षण हों जिन्हें शारीरिक जांच के दौरान अनदेखा कर दिया गया हो)
डॉक्टर अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों की भी जांच करते हैं (जैसे ऑब्सेसिव-कम्प्लसिव विकार या सामाजिक चिंता विकार), जो कि घबराहट के दौरों का कारण हो सकते हैं।
बच्चों में पैनिक डिसऑर्डर का उपचार
आमतौर पर दवाइयां और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी
आमतौर पर दवाइयों और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी का संयोजन पैनिक विकार के लिए प्रभावी होता है। कुछ बच्चों में, व्यवहार से जुड़ी थेरेपी की शुरुआत करने से पहले, घबराहट के दौरों को नियंत्रित करने के लिए बार-बार दवाओं की ज़रूरत होती है।
छोटी अवधि में चिंता के क्षणिक लक्षणों से राहत पाने के लिए बेंज़ोडायज़ेपाइन सबसे प्रभावी दवाइयां हैं, लेकिन सलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इन्हिबिटर (SSRI) नामक एंटीडिप्रेसेंट के एक वर्ग को अक्सर पसंद किया जाता है, क्योंकि बेंज़ोडायज़ेपाइन उनींदेपन (सेडेशन) का कारण बनते हैं, सीखने और याददाश्त में रुकावट डाल सकते हैं, और संभावित रूप से निर्भरता का कारण बन सकते हैं।
पैनिक विकार का पूर्वानुमान
उपचार के साथ, पूर्वानुमान अच्छा है। उपचार के बिना, किशोर बच्चे स्कूल छोड़ सकते हैं, समाज से अलग हो सकते हैं और एकांतवादी और आत्मघाती बन सकते हैं।



