ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफैक्टा

(ब्रिटल हड्डी का रोग)

इनके द्वाराEsra Meidan, MD, Boston Children's Hospital
द्वारा समीक्षा की गईMichael SD Agus, MD, Harvard Medical School
समीक्षा की गई/बदलाव किया गया संशोधित अक्टू॰ २०२५
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ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा एक आनुवंशिक विकार है, जो हड्डियों में विकृति उत्पन्न करता है तथा उन्हें असामान्य रूप से कमजोर बना देता है।

  • यह विकार कुछ जीनों में म्यूटेशन के कारण होता है।

  • विशिष्ट लक्षणों में कमज़ोर हड्डियां शामिल हैं जो आसानी से टूट जाती हैं।

  • निदान लक्षणों और आनुवंशिक परीक्षण पर आधारित है।

  • कुछ दवाएं हड्डियों को मजबूत करने में मदद कर सकती हैं और ग्रोथ हार्मोन के इंजेक्शन कुछ बच्चों की मदद कर सकते हैं।

ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा एक ऑस्टियोडिसप्लासिया है। ओस्टियोडिसप्लासिया ऐसे विकार हैं, जो हड्डी के विकास को अस्तव्यस्त कर देते हैं। ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा सबसे अधिक ज्ञात ऑस्टियोडिसप्लासिया है।

ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा में, हड्डी के सामान्य घटकों में से एक कोलेजन का सिंथेसिस, अधिकांश प्रभावित लोगों में कोलेजन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जीन में म्यूटेशन के कारण बिगड़ा हुआ होता है। हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं और आसानी से टूट (फ्रैक्चर) जाती हैं।

ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा के 5 मुख्य प्रकार हैं (I, II, III, और IV) हैं। कई अन्य दुर्लभ प्रकार हैं, जो विभिन्न जीन में म्यूटेशन के कारण होते हैं।

ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा के लक्षण

ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा के लक्षण हल्के से गंभीर हो सकते हैं।

ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा वाले अधिकांश लोगों की हड्डियां कमज़ोर होती हैं और लगभग 70% लोगों में सुनने की क्षमता कम हो जाती है।

ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा से कुछ लोगों में आँखों का सफेद हिस्सा (स्कलेरा) नीला पड़ जाता है। नीला रंग इसलिए दिखता है, क्योंकि स्कलेरा के नीचे की असामान्य शिराएं दिखने लग जाती हैं। स्कलेरा सामान्य से पतली हो जाती है, क्योंकि कोलेजन पूरी तरह से नहीं बना।

ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा के प्रकार के हिसाब से बच्चों के दांत बदरंग और अजीब तरह से विकसित हो सकते हैं (जिसे डेंटियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा कहते हैं)।

कभी-कभी ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा से पीड़ित बच्चों में दिल या फेफड़ों की बीमारियां हो सकती हैं।

ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफैक्टा (ब्लू स्कलेरे)
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इस फोटो में नीले स्कलेरा वाली आँखों का एक पास का व्यू दिखाया गया है जो आमतौर पर सफेद होती हैं।

जेम्स स्टीवेंसन/SCIENCE PHOTO LIBRARY

टाइप I ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा सबसे हल्का प्रकार है। कुछ बच्चों में जोड़ों के ढीला होने की वजह से सिर्फ़ नीले स्कलेरा और मांसपेशियों और जोड़ों का दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। इस प्रकार की समस्या वाले बच्चों में बचपन के दौरान फ्रैक्चर होने का जोखिम ज़्यादा बढ़ जाता है।

प्रकार II ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा सबसे गंभीर प्रकार है और घातक है। आमतौर पर जन्म के समय शिशुओं की बहुत सारी हड्डियां टूटी हुई होती हैं। खोपड़ी इतनी नरम हो सकती है कि प्रसव के दौरान सिर पर पड़ने वाले दबाव से मस्तिष्क सुरक्षित नहीं रह पाता है और इसके कारण मस्तिष्क में और उसके आसपास रक्तस्राव हो सकता है तथा मृत शिशु का जन्म हो सकता है। इन बच्चों के हाथ और पैर छोटे और स्कलेरा नीले रंग का होता है। इस प्रकार के शिशुओं की जीवन के पहले कुछ दिनों या सप्ताहों में अचानक मृत्यु हो सकती है।

प्रकार III ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा सबसे गंभीर प्रकार है और यह घातक नहीं है। इस टाइप से पीड़ित बच्चे बहुत छोटे होते हैं और उनकी रीढ़ की हड्डी टेढ़ी होती है और वह बार-बार फ्रैक्चर होती रहती है। इस टाइप से पीड़ित बच्चों की हड्डियां अक्सर बहुत मामूली चोटों से टूट जाती हैं, आम तौर पर ऐसा तब होता है, जब बच्चे चलना शुरू करते हैं। इन बच्चों में एक बड़ी खोपड़ी और चेहरे का तिकोना आकार भी होता है जो सिर के ज़्यादा विकसित होने और चेहरे की हड्डियों के कम विकसित होने के कारण होता है। छाती की विकृतियां आम हैं। स्कलेरा का रंग अलग-अलग हो सकता है।

ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा (स्केलेटल संबंधी समस्याएं)
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इस फोटो में गंभीर ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा से पीड़ित एक व्यक्ति को दिखाया गया है जिसमें बैरल चेस्ट, मुड़ी हुई रीढ़, हड्डी की गंभीर विकृति, ढीले जोड़ और खराब मांसपेशियों का विकास जैसे विकार हैं।

आर एम.ए. अंसारी/SCIENCE PHOTO LIBRARY

टाइप IV ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा गंभीरता में व्यापक रूप से होता है और विकृति पैदा कर सकता है। इस प्रकार के बच्चों में यौवन से पहले तक बचपन में हड्डियां आसानी से फ्रैक्चर हो जाती हैं। स्कलेरा आमतौर पर सफेद होता है। बच्चों का कद छोटा होता है। इस प्रकार के बच्चे उपचार से लाभ पा सकते हैं, और जीवित रहने की दर अधिक होती है।

प्रकार V ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा में अग्रभुज हड्डियों के बीच मेंब्रेन का सख्त होना शामिल हो सकता है, जो गतिशीलता को सीमित करता है। बच्चों में एक हाथ की हड्डी (रेडियस) होती है जो कोहनी पर डिसलोकेट हुई होती है। फ्रैक्चर से ठीक होने पर हड्डियों में असामान्य रूप से वृद्धि हो सकती है।

ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा का निदान

  • जन्म से पहले, कभी-कभी प्रसवपूर्व अल्ट्रासाउंड, कोरियोनिक विलस सैंपलिंग या एम्नियोसेंटेसिस

  • जन्म के बाद, डॉक्टर का मूल्यांकन और कभी-कभी कोशिकाओं या आनुवंशिक परीक्षण का विश्लेषण

जन्म से पहले, जन्मपूर्व अल्ट्रासाउंड द्वारा गर्भवती महिलाओं में ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा का पता लगाया जा सकता है। निदान करने के लिए डॉक्टर कोरियोनिक विलस सैंपलिंग या एम्नियोसेंटेसिस जैसे अन्य परीक्षण कर सकते हैं।

जन्म के बाद, डॉक्टर ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा के निदान करने के लिए लक्षणों और शारीरिक जांच के परिणामों को आधार बनाते हैं। अगर निदान से साफ़ पता न चले, तो डॉक्टर एक प्रकार के संयोजी ऊतक कोशिका जिसे फ़ाइब्रोब्लास्ट कहा जाता है, उसका विश्लेषण करने के लिए माइक्रोस्कोप के नीचे जांच (बायोप्सी) के लिए त्वचा का एक नमूना निकाल सकते हैं या वे कुछ जीन का विश्लेषण करने के लिए रक्त का नमूना ले सकते हैं।

एक्स-रे से हड्डी की असामान्य संरचना का पता चल सकता है, जो ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा की ओर इशारा करते हैं।

सुन पाने क्षमता को मॉनिटर करने के लिए ऑडियोमेट्री नामक एक टेस्ट अक्सर बचपन में किया जाता है।

ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा का इलाज

  • बिस-फ़ोस्फ़ोनेट

  • वृद्धि हार्मोन

  • कभी-कभी डेनोसुमैब, टेरिपैराटाइड और/या विटामिन D के सप्लीमेंट

ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा का कोई इलाज नहीं है, लेकिन लक्षणों और कुछ जटिलताओं को प्रबंधित करने के लिए उपचार उपलब्ध हैं।

बिसफ़ॉस्फ़ोनेट नाम की एक दवाई से हड्डियों को मज़बूत बनाने और हड्डी के दर्द को कम करने तथा रीढ़ की हड्डी के फ्रैक्चर और कर्व होने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। बिसफ़ॉस्फ़ोनेट को शिरा द्वारा दिया जा सकता है (उदाहरण के लिए, पैमिड्रोनेट और ज़ोलेड्रॉनिक एसिड) या मुंह द्वारा (एलेंड्रोनेट) लिया जा सकता है।

बिसफ़ॉस्फ़ोनेट के अलावा ग्रोथ हार्मोन इंजेक्शन कुछ बच्चों में ग्रोथ और हड्डी की ताकत में सुधार कर सकते हैं।

बिसफ़ॉस्फ़ोनेट के समान एक दवा डेनोसुमैब है, यह हड्डियों के नुकसान को रोकने में मदद करती है और खास तौर पर इंजेक्शन के रूप में दी जाती है। यह कुछ ऐसे लोगों की मदद कर सकता है, जिन्हें ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा है।

टेरिपैराटाइड पैराथायरॉइड हार्मोन का एक सिंथेटिक रूप है। यह दवा हड्डी के गठन को उत्तेजित करती है और ताकत बढ़ाती है। इसको त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है। बच्चों को टेरिपैराटाइड नहीं दी जा सकती है।

विटामिन D एक ऐसा विटामिन है, जो शरीर को कैल्शियम और फ़ॉस्फ़ोरस को अवशोषित करने में मदद करता है, जो स्वस्थ हड्डियों के लिए आवश्यक हैं। जिन लोगों को ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा होता है, अगर उनके शरीर में पर्याप्त विटामिन D हार्मोन नहीं (विटामिन D की डेफ़िशिएंसी) है, तो डॉक्टर उन्हें विटामिन D के सप्लीमेंट देते हैं।

डॉक्टर टूटी हुई हड्डियों का उपचार उसी तरह से करते हैं जैसे वे उन बच्चों के लिए करते, जिनको ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा नहीं है। हालांकि, जिन बच्चों में ओस्टियोजेनेसिस इंपरफ़ेक्टा है, उनमें टूटी हुई हड्डियां विकृत हो सकती हैं या बढ़ने में विफल हो सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप, जिन बच्चों की बहुत सी हड्डियां टूटी हों उनके शरीर का विकास स्थायी रूप से अवरुद्ध हो सकता है तथा विकृतियां आम बात है। ग्रोथ को स्थिर करने और फ्रैक्चर को रोकने के लिए, डॉक्टर सर्जिकल रूप से धातु की छड़ को लंबी हड्डियों जैसे कि बाहों और पैरों में इम्प्लांट कर सकते हैं।

फ़िज़िकल थेरेपी और व्यावसायिक थेरेपी कार्य में और मांसपेशियों की ताकत में सुधार करने में मदद करती है। मामूली चोटों से बचने के उपाय करने से फ्रैक्चर से बचने में मदद मिल सकती है।

जिन बच्चों को सुनने में समस्या है उन्हें कॉक्लियर इंप्लांट (यह एक डिवाइस है जो ध्वनि तरंगों को इलेक्ट्रिक सिग्नल में बदलकर कान के अंदरूनी हिस्से में लगे इलेक्ट्रॉड में भेजता है) लगाया जा सकता है।

अधिक जानकारी

निम्नलिखित अंग्रेजी-भाषा संसाधन उपयोगी हो सकते हैं। कृपया ध्यान दें कि इस संसाधन की सामग्री के लिए मैन्युअल उत्तरदायी नहीं है।

  1. Osteogenesis Imperfecta (OI) Foundation

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